Sunday, December 12, 2021

कोविड काल में जैविक उत्पादों का बढ़ता बाजार एवं लूट

  

कोरोना महामारी के काल में हम सब के सामने विषम परिस्थितिया खड़ी हुई है , जिसमे युवाओं के लिए रोजगार सबसे बड़ी चुनौती देखने को मिल रही है,इस बेरोजगारी  में सबका ध्यान कृषि  क्षेत्र की तरफ आने लगा है जो लोग अपनी कृषि योग्य भूमि को छोड़ कर पलायन कर चुके थे धीरे धीरे वापस आने लगे है ,परन्तु अब गौर करने वाली बात यह है की इस कोविड के काल में कृषि क्षेत्र  के उत्पादन की और युवा वर्ग का ध्यान तो जा रहा है लेकिन सिर्फ उत्पाद विपड़न की ओर क्योकि उन युवा वर्ग ने सुना है या इंटरनेट शिक्षा के माध्यम से जानकारी हासिल कर ली है की कृषि में जैविक बाजार की मांग आसमान छू रही है इसलिए युवा वर्ग ने अपना लक्ष्य जैविक उत्पादों के विपड़न को बना दिया है,इस दौड़ में कई ऐसे लोग भी बाजार में चुके है जिनको कृषि का ज्ञान शून्य के बराबर है स्थानीय उत्पादों की कोई जानकारी नहीं है,कृषि तकनीकी का भी कोई ज्ञान नहीं है और ना ही उत्पादों के रचना के बारे मे जानकारी रखते है,बस विपणन की होड़ में बहे जा रहे है सिर्फ लघु अवधि में पैसा कामना उद्देश्य हो गया है और जैविक उत्पादों के नाम पर उपभोकता को लूटना, इस जैविक बाजार के लूट के दौर में ऐसे उपभोकता को शिकार होना पड़ रहा है जो अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक है क्योंकि शुद्ध एवं रसायनमुक्त उत्पादों का सेवन सभी करना चाहते है लेकिन पूंजीपति लोगो तक ही जैविक उत्पादों की पहुंच हो रही है गरीब और आम जनमानस के स्वास्थ्य के विषय में कोई नहीं सोच रहा है की वह वर्ग भी रसायनमुक्त अनाज खायें! उनके लिए सिर्फ सरकारी सस्ते(PDS)राशन की दुकानों का गेहूं चावल चना वितरण किया जा रहा है ! इस पर कोई सोचे तो बदलावों की संभावना हो पायेगी कि आम जान तक जैविक शुद्ध एवं रसायनमुक्त अनाज उपलब्ध हो पाये ! 

अब जहाँ तक प्रश्न है कि यदि सभी लोग बाजार मे विपड़न को लेकर कार्य करने लगे तो कृषि कार्य कौन करेगा कृषि कार्य तो कोई नहीं करना चाहता है लेकिन मे किसान हूँ और किसान का बेटा कहना तो सब चाहते है?

कुर्सी और टेबल का सहारा लेकर विपणन सम्बन्धी बैठक करना लेवल , पैकिंग , ब्रांडिंग की चर्चाये सब कर रहे है,लेकिन उत्पादन कैसे बढ़ाया जाये यह कोई नहीं कह रहा है मैंने सवयं बड़ी बड़ी सेमिनारों मे सुना है कि विपड़न की प्रकिर्या ऐसे होगी इतना मीट्रिक टन विपड़न किया जाएगा परन्तु विपड़न होगा कहा से जब जैविक उत्पादन ही नही होगा अन्यथा जो युवा वर्ग सिर्फ इस प्रकार के विपड़न की बात करते है कही उनका पुराना व्यवसाय या इस आपाधापी में छूट जाये!

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार व्यक्तिगत है !

 विचारक - पुष्पा जोशी ,देहरादून

Time 1.37pm 

Date : 13.12.2021 

 

5 comments:

  1. लेखिका ने सही समस्या की ओर ध्यान खींचा है। पिछले दो वर्षों में महामारी के वीभत्स रूप को देखने के बाद भी एक वर्ग ऐसा है जो हर स्थिति में सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाना चाहता है। शर्म, संकोच, जिम्मेदारी, काबिलियत सब ताक पर रखे धूल खा रहे हैं। आज के समाज में ये बेमानी हैं और इनकी बात करना या इनपर चलने की कोशिश करना मूर्खता माना जाता है। धोखाधड़ी और तिसपर बेशर्मी आज के उन्नत समाजिकों के मुख्य लक्षण हैं। Ethical values नैतिक मूल्य किस चिड़िया का नाम है? आप जैसी योग्य लेखिका से इस दिशा में समाधान देते हुए अगले लेख की अपेक्षा है। छोटे पैमाने में घरेलू आपूर्ति के लिए वर्ष भर की आवश्यकताओं को देखते हुए जैविक खेती हेतु जानकारी देने की कृपा करें।

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  2. All the problems which were faced by the youth during pandemic are mentioned in the article by the writer.

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