Friday, November 4, 2022

बूढ़ी दिवाली एवं तुलसा एकादशी

कुमाऊं की परंपरा के अनुसार आज के दिन कुमाऊं में बूढ़ी दिवाली  मनाई जाती है ,कोजागिरी पूर्णिमा से बूढ़ी दिवाली तक कुमाऊं में दिवाली के दिए जलते रहते हैं!

 कार्तिक महीने की एकादशी का दिन दीपावली का आखिरी दिन बूढ़ी Deepawali के रूप में मनाया जाता है ,माना जाता है कि आज दीपावली का पर्व पूरा हुआ !

आज ही के दिन आंगन में बनी ओखली ,मुसल और सूप मैं Aipen दिए जाते हैं और शाम को दीए जलाए जाते हैं और कहा जाता है आओ लक्ष्मी बैठो नारायण निकल  भुइया निकल निकल! 

सूप के भीतर की ओर लक्ष्मी नारायण की आकृति बनाई जाती है लेकिन बाहर की ओर Ghuyiya  की आकृति बनाते हैं Ghuyiya  की आकृति में दो  सिर और चार पैर बने होते हैं  इनका मुंह नहीं बनाया जाता है, गोल-  गोल घुमावदार आकृति कर सर बनाते हैं ! 

इस पर्व से हम सभी समझ सकते हैं कि  फसल कटने के पश्चात उत्पादन की कुटाई और सफाई में काम आने  वाले ओखली , मुसल और  सूप का पूजन करने के पश्चात जो फसल  उत्पादित हुई है उसकी  कुटाई एवं सफाई  करने के पश्चात और उस उत्पादन का भरपूर उपयोग  हम सभी कर सकते हैं!

विचारक 
पुष्पा जोशी 
4.11.2022
5:00pm

Saturday, September 24, 2022

श्रद्धांजलि...Ankita ..

कितना दर्द कितनी पीड़ा हुई होगी तुझे जब तेरी आत्मा को तड़पाया होगा उन दरिंदों , भेड़ियों ने.   तू तो इतनी दूर से पहाड़ उतर कर ऋषिकेश आई थी कि  कुछ करूंगी जीवन में  लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था , इन भेड़ियों ने तुझे जिंदा खा लिया बच्चे , तेरे साथ क्या-क्या हुआ वह तुझे और तेरी आत्मा को पता होगा तूने कितना  सहन किया होगा,  कितनी मजबूर रही होगी उस समय तू जब तेरे सामने यह तीन  भेड़िए खड़े होंगे.

तुझे जिंदा नहर में फेंका या मार कर फेंक  दिया वह तो हम नहीं जानते वह तो यह दरिंदे ही जानते होंगे.
तेरा बदला  रिजॉर्ट को  गिरा देने से नहीं लिया जा सकता बच्चे .

तुझे इंसाफ मिलेगा  या नहीं , या सिर्फ 1 सप्ताह हो हल्ला होगा फेसबुक व्हाट्सएप पर लोग अपने अपने विचार रखेंगे और चिल्लाएंगे ,भाषण बाजी पेपर बाजी होगी उसके बाद फिर सब ठंडे बस्ते में चला जाएगा .

सबूत मिटाने के लिए रिजॉर्ट को ढहा दिया गया तुझे न्याय मिलने में पता नहीं कितने वर्ष लग जाएंगे बेटा यही इस समाज और न्यायिक प्रक्रिया का सिस्टम है ! 

जो भी इस घटना कुकृत्य को सुन रहा है वह  मौन हो जा रहा है , लेकिन हम कुछ कर नहीं पा रहे हैं सिर्फ 2 मिनट के लिए चुप जैसे हो जा रहे हैं, मन के अंदर बहुत क्रोध उत्पन्न हो रहा है लेकिन हम तेरे न्याय के लिए सरकार की ओर और हमारे न्यायिक प्रक्रिया  का मुंह देख रहे हैं .

अंकिता बच्चे तू जहां भी है ऐसे भयंकर दरिंदों को पनपने मत देना बेटा ...इस धरती पर  पुनः जन्म लेना और किसी न किसी रूप में अपना बदला अवश्य लेना ...

तेरे मां पिताजी पर क्या गुजर रही होगी बेटा उनका दुख तो कोई जान ही नहीं सकता उनकी पीड़ा कोई समझ ही नहीं सकता...

माफ करना हम सबको क्योंकि हम ऐसे समाज का हिस्सा है...
ऐसे दरिंदे अचानक पैदा नहीं होते हैं उनको पैदा करने में बहुत लोगों का हाथ होता है...😭 

व्यथित मन से तुझे श्रद्धांजलि
Pushpa😭
24.9.2022 
2p.m. 

Friday, August 12, 2022

श्रावणी पूर्णिमा , रक्षाबंधन एवं कुमाऊं में जनेऊ पूजा

रक्षाबंधन के दिन कुमाऊं में जनेऊ पूजा की भी परंपरा है इस अवसर हेतु कुल पुरोहित द्वारा अपने यजमान के लिए जनेऊ पूरे विधि विधान के अनुसार बनाई जाती है ! 

जनेऊ बनाने का कार्य पुरोहित द्वारा लगभग 2 माह पूर्व से प्रारंभ किया जाता है,  एक विशेष शारीरिक मुद्रा में  जनेऊ बनाई जाती है घुटना 90 डिग्री में मोड़ कर  दाई  जांघ  को ऊपर उठाते हुए उस पर तकली घुमाते तथा बाए हाथ की डोर को  हवा में ऊपर उठाकर जनेऊ  कताई का कार्य  किया जाता  है, जनेऊ को तैयार करने में काटने ,लपेटने, ग्रंथि डालने और रंगने  के कार्य  को कई प्रक्रियाओं से होकर गुजारना पड़ता है !

सदियों वर्ष पूर्व शुद्ध जगह पर उगी कपास को 3 दिन धूप में सुखाकर रुई से धागा भी स्वयं  बनाना होता था लेकिन आज जनेऊ का बारीक धागा बाजार में उपलब्ध होता है बाजार से मिले धागे को जनेऊ की माप में तीन सूत्रों को साथ लेकर हथेली खोलकर 4 अंगुलियों पर या 96 बार लपेटा जाता है  96 की संख्या में 32 विधाओं 4 वेद, 4 उपवेद, 6अंग, 6 दर्शन, 3 सूत्र  ग्रंथ ,और 9Arnayay  आते हैं  तथा 64 कलाओं का प्रतिनिधित्व माना जाता है ! 
जब सभी जनेऊ हो तैयार हो जाती हैं तत्पश्चात हल्दी के रंग में रंगने का कार्य प्रारंभ होता है एवं जनेऊ को धूप में सुखाया जाता है ! 
पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन किसी मंदिर में या किसी के घर पर कुल पुरोहित द्वारा जनेऊ की प्रतिष्ठा एवं पूरे विधि विधान के अनुसार यजमान की उपस्थिति में पूजा की जाती है एवं सभी पुरुष वर्ग जिनका  जनेऊ संस्कार हो गया हो वह सामूहिक रूप से जनेऊ धारण करते हैं  एवं  कुल पुरोहित द्वारा अपने-अपने  यजमानों को  वर्ष भर के लिए जनेऊ  भेंट की जाती है एवं  यजमान द्वारा अपने कुल पुरोहित को जनेऊ की दक्षिणा भी  दिए जाने की  परंपरा है ! 


 विचारक
 पुष्पा जोशी
12: 40 
12.08.2022

Saturday, July 16, 2022

सुख एवं समृद्धि का प्रतीक उत्तराखंड का पर्व हरेला त्यौहार, श्रावण मास संक्रांति.


हरेला पर्व खुशहाली और सुख समृद्धि का प्रतीक है, उत्तराखंड के कुमाऊ क्षेत्र में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है ! 

हरेला बुवाई.. पर्व के 10 दिन पूर्व यानी आषाढ़ मास में की जाती है इसमें सभी प्रकार की  खरीफ फसलों के बीजों की जो कि 5 या 7 प्रकार के होते हैं , (बीजों की बुवाई  टोकरी में मिट्टी  भर कर की जाती है  वह मिट्टी किसी फल के पेड़ के नीचे की  साफ जगह की होनी आवश्यक है ) टोकरी को पूजा घर में रखा जाता है प्रतिदिन  प्रातः कालीन पूजा में जल का छिड़काव किया जाता है ताकि बीजों का अंकुरण एवं संरक्षण होता रहे !

बीज बुवाई  के दसवें दिन यानी कि श्रावण मास की संक्रांति को प्रातः काल घर में पूजा करके घर के बुजुर्ग या बड़े सदस्य हरेला काटते हैं और पकवान बनाए जाते हैं , भगवान को भोग लगाया जाता है एवं हरेला भगवान के चरणों में अर्पित किया जाता है ! तत्त्पश्चात परिवार के सभी सदस्यों को  तिलक करके सिर में आशीर्वाद स्वरुप हरेला को रखा जाता है ! 
हरेला ( कृषि हरियाली पर्व ) से यह भी अनुमान लगाया जाता है कि इस वर्ष खरीफ की फसल की पैदावार कैसी होगी ! 

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यह हरेला त्यौहार खरीफ फसल का एक सैंपल स्वरूप है प्रकृति इसी के अनुरूप रही तो फसल की पैदावार पर इसका (प्रतिकूल या अनुकूल ) क्या प्रभाव पड़ेगा ! 

विचारक
पुष्पा जोशी
16.7.2022
12.30pm ..








Sunday, July 10, 2022

चातुर्मास प्रारंभ , देवशयनी एकादशी एवं तुलसी रोपण, धरती मां का श्रंगार...

आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से माना जाता है, इस  दिन से चातुर्मास भी प्रारंभ हो जाता है ! 

धार्मिक मान्यताओं एवं शास्त्रों के अनुसार श्री हरि विष्णु शिरसागर में विश्राम हेतु चले जाते हैं एवं धरती पर विष्णु भगवान की पूजा तुलसी जी के साथ करने का विधान है ! 

इसीलिए आज के दिन औषधीय  पौधा (तुलसी पौधे ) का रोपण किया जाता है  ! पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो चातुर्मास प्रारंभ होते ही  धरती मां का श्रृंगार वृक्षारोपण कर किया जाता है इसीलिए प्रथम रूप से तुलसी पौधे का रोपण किया जाना शास्त्रों में वर्णित है ! 

जिसका  कारण चातुर्मास में कई प्रकार की विषाणु जनित बीमारियां  फैलती है तुलसी पत्तियां ग्रहण करने  से विषाणु जनित बीमारियों का  नाश होता है इसीलिए धार्मिक मान्यताओं के पीछे कहीं ना कहीं विज्ञान छिपा हुआ है ! 

विचारक 
पुष्पा जोशी 
22.20pm 
10.7.2022


Sunday, July 3, 2022

पुदीना हल्दी एवं गिलोय एक साथ एक में गमले में

पुदीना हल्दी एवं गिलोय एक साथ एक गमले  मैं ..
 पुदीना -  मैं कफ और वात  जैसी समस्या को कम करता हूं आपकी भूख बढ़ाता हूं ,मुझे पेचिश, बुखार पेट संबंधी रोग आदि उत्पन्न विकार को ठीक करने में महारत हासिल है मैं आपका मुख्य आहार तो नहीं हूं परंतु मेरी उपस्थिति से भोजन का स्वाद और अधिक बढ़ जाता है! 

गिलोय-  मेरा प्रचार तो पिछले 10 वर्षों में पतंजलि के बाबा रामदेव जी द्वारा काफी हो गया है लेकिन आमजन मुझे उपयोग मैं कम ही ला रहे हैं क्योंकि उपयोग से पहले मुझे खाने योग्य बनाने में थोड़ा बहुत मेहनत तो लगती ही है आपको पूर्ण रूप से पता है कि मैं कितना उपयोगी हूं आपके लिए लेकिन आप अपनी दैनिक दिनचर्या में मेरा उपयोग थोड़ा बहुत भी नहीं करते है , वह लोग  अवश्य करते हैं जिनको मैं डिब्बे में बंद तैयार मिलता हूं आपसे निवेदन है मुझे अपने घर आंगन में आने का अवसर दें तब देखे मेरा लाभ वैसे भी वर्षा ऋतु प्रारंभ होने वाली है मित्रों मेरा उपयोग अवश्य करें !

हल्दी - मेरे बगैर तो आपका भोजन चमकीला दिखता ही नहीं है और मैं औषधीय गुणों से भरपूर हूं कभी-कभी मुझे अपने आप में अभिमान भी होता है ,आपके घर में कोई भी शुभ कार्य मुझसे ही प्रारंभ होते हैं मेरी गांठ तो क्या मेरी पत्तियां भी उपयोगी है चाहे तो पानी में उबालकर ही पी लिया करें ! 😊🤗

विचारक 
पुष्पा जोशी
3.7.2022 - 5.20pm 

Saturday, May 7, 2022

मातृ दिवस पर विशेष 8 May 2022🤗

 सुबह जब मैं उठी मुझे समझ  नहीं आया की मेरी फोटो क्यों  खीची जा रही है, मुझे चाय भी बिस्तर में ही मिल गई, और मेरी बहू ने मुझे मेरे हाथ में चाय का कप दिया और मेरी पोती को बोला की दादी के साथ मेरी एक फोटो ले ले मैं बहुत खुश  थी  की मेरी बहू कितनी अच्छी है मेरे साथ फोटो ले  रही है ! 

 लगभग 10:00 बजे की बात है  मेरे बेटे का फोन आया और उसने मुझसे पूछा मां क्या तेरी तबीयत ठीक नहीं है ?  मैंने कहा मैं बिल्कुल ठीक हूं लेकिन उसने उत्तर  मैं कहा कि मैंने तेरी फोटो देखी आज, उसमें तुम बहुत कमजोर लग रही हो मैंने  बेटे से पूछा तुमने मेरी फोटो कहां देखी ,  बेटे का उत्तर था आज मातृ दिवस है  आपकी बहू ने आपकी फोटो अपने स्टेटस लगाई है.....

उन सुंदर महिलाओं को भी मातृ दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं जिनके नजर अपने सासु मां की गहनों में टिकी हुई है!

🙏मातृ दिवस सिर्फ WhatsApp स्टेटस में फोटो लगाने के लिए नहीं है प्रत्येक दिन मातृ दिवस हो सकता है  यदि उसको सम्मान और  सेवा  मिलेगी तो 🙏

विचारक 
पुष्पा 

Thursday, March 10, 2022

कुमाऊनी होली विशेष ... कुमाऊनी होली मात्र ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली ही नहीं है बल्कि...

 मैं बचपन से आज तक देखते आ रही हूं  शिवरात्रि के बाद कुमाऊं में होली अपने  यौवन में रंग भरने लगती है, पौष माह के प्रथम रविवार से प्रारंभ होने वाली होली शिवरात्रि के बाद अपने पूरे चरम पर होती है ,कुमाऊं के लोग चाहे किसी भी शहर में   वास कर रहे हो फाल्गुन आते ही उनका मन होली गायन के लिए मचलने लगता है जाने अनजाने हर कोई होली के गीतों को गुनगुनाने लगता है! 

नदी यमुना के तीर कदम चढ़ी कान्हा बजाई गयो बांसुरिया!
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में!
झनकारो झनकारो झनकारो गोरी प्यारो लागो तेरा झनकारो!

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंग भरे वस्त्र धारण किए जाते हैं महिलाएं व्रत रखकर आंवला पेड़ की पूजा करती है और तत्पश्चात शुरू होती है पांच दिवसीय बैठकी एवं खड़ी होली पुरुष वर्ग एक सामूहिक स्थान में एकत्र होकर अपने इष्ट देव की पूजा कर  चीर बंधन करते हैं, पुरुषों में होली  गायन में  मुख्यतः विशेष श्रृंगार रहता है जिसमें संयोग वियोग के परिदृश्य को गीतों के माध्यम से गाया जाता है , पुरुष वर्ग की होली में जय जयवंती ,भैरवी आदि राग रागिनी की तर्ज पर गाई जाती है,  वहीं महिला वर्ग  में राधा कृष्ण का  प्रेम, गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम श्रद्धा भाव , राम के बनवास का वर्णन ,रावण का अशोक वाटिका में जाना, मंदोदरी का सीता से मिलना, राम विवाह ,शिव भक्ति, राम भरत मिलाप ,का वर्णन एवं साथ ही साथ देवर भाभी का मजाकिया अंदाज , एक महिला का अपने सैया से बिरह वियोग  होना, ननद भाभी की अठखेलियां एवं सखियों के साथ राधा का कृष्ण के प्रति प्रेम को बहुत ही शानदार एवं श्रृंगार के साथ लइबद्ध तरीके से गाए जाते हैं , ढोलक मजीरा की धुन इन गीतों को और भी मोहक मनमोहक बना देती हैं !

एकादशी से पूर्णिमा तक कुमाऊं के हर घर में होली गायन की परंपरा सदियों से चली आ रही है दोपहर 1:00 बजे से शाम के लगभग 6:00 बजे तक पुरुष एवं महिलाएं होली को होली गायन से फुर्सत नहीं रहती है वही  शहरों की बात करें तो दिल्ली,देहरादून ,कानपुर ,लखनऊ ,चंडीगढ़, इंदौर, पुणे मुंबई जैसे बड़े शहरों में रह रहे कुमाऊं के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा का निर्वहन बड़े उल्लास से कर रहे हैं! 

विचारक
पुष्पा  जोशी
10 March 2022
23:47

Monday, March 7, 2022

महिला दिवस 8.March.2022 पर विशेष

आज बड़ी बिंदी वाली 👩‍🏫, 🤭 उदारवादी  महिलाओं का दिन बड़े-बड़े कॉन्फ्रेंस में महिला अधिकारों के मुद्दे पर चर्चा करते हुए व्यतीत हो रहा होगा या होगा , या फिर वातानुकूलित कमरे में गर्म -गर्म सूप या कॉफी का सेवन करते साथ में महिला घरेलू हिंसा या सामाजिक शोषण जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रही होंगी की जा रही होगी! 

मेरे मन में एक प्रश्न है यह उदारवादी  महिलाएं क्या  इन्होंने अपने घर में काम करने वाली महिला को आज के दिन अवकाश दिया होगा?

सबसे पहले प्रात: से ही उससे घर का झाड़ू पोछा बर्तन का काम करवाया होगा या फिर उसको बोला होगा आज सुबह जल्दी आ जाना क्योंकि मुझे कॉन्फ्रेंस में या किसी पार्टी में जाना है क्योंकि आज महिला दिवस है !

900 चूहे खाकर बिल्ली चली हज को 😆

धिक्कार है तुझे एवं तेरी अंतरात्मा को महिला दिवस के नाम पर तू पार्टी कर रही है या महिला मुद्दों के नाम पर दिखावा एवं छलावा कर रही है, यह तेरा ही अंतरूप है  जिसके साथ तू ऐसा व्यवहार कर रही है तुझे महिला कहूं या राक्षसी तू तो अपनी परछाई भी नहीं पहचान पा रही है!
मैंने तो सुना है कि महिलाओं को सम्मान और प्यार देने को लेकर और उनके हौसलों को बुलंद करने और असमानता को कम  करने के लिए यह दिन काफी है लेकिन क्या हम यह कर पाते है स्वयं से अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए..

इसलिए राह संघर्ष की हम चुने जिंदगी आंसुओं से नहाई  ना हो शाम  शहमी  ना हो , रात हो ना डरी भोर की आंख  फिर ढब Dabayi ना हो!

बड़े-बड़े कॉन्फ्रेंस में भाषण बाजी करना सिर्फ महिला मुद्दों पर बातें करना महिला दिवस नहीं होता है , महिला दिवस  यदि वास्तविकता में महिला दिवस मनाना ही है तो उसके लिए बुनियादी काम करने की आवश्यकता है जिससे उस  जरूरतमंद महिला को वास्तव में खुशी हो जिससे उसकी आत्मा खुश हो जाए !! 



विचारक 
पुष्पा जोशी 
8 March 2022 
11:00am 

Saturday, January 22, 2022

मै था अनभिज्ञ

मुझे पता ही नहीं था कि मैं इतने पौष्टिक गुणों से भरपूर हूं मुझ में कैल्शियम प्रोटीन ऊर्जा आदि तत्व  पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं इस बात की मुझे कोई जानकारी नहीं थी !
आज से 10 से 15 वर्ष पूर्व मैं घर के किसी कोने में पड़ा रहता था मुझे कोई पूछता ही नहीं था ,मेरा कोई मूल्य नहीं था, लोग अपने पशुओं के लिए आहार हेतु मेरा उपयोग किया करते थे, मैं सिर्फ गरीबों के भोजन का हिस्सा था !
जिनके पास थोड़ा बहुत पैसा होता था वह मुझे देखना भी पसंद नहीं करते थे क्योंकि मैं काला या मटमैला सा हूं मेरा कोई मूल्य नहीं था, लोग आपस में ही मेरा आदान- प्रदान कर लेते थे मैं बिना मूल्य के था ! 
हालांकि मेरी पैदावार अच्छी होने के बावजूद भी कई वर्षों तक घर के कोने में  पड़ा रहता था       परंतु वर्तमान में...😎
 पिछले 10 वर्षों में मेरी तो कायाकल्प हो गई मेरी  मांग बढ़ने लगी मेरे गुणों पर शोध होने लगा है, बड़ी-बड़ी किताबें लिखी गई और पौष्टिक आहार के रूप में चर्चित होने लगा ! अब मैं नीचे से ऊपर की ओर बढ़ने लगा हूं अब मैं भी  सामर्थ्यवान लोगों के भोजन का हिस्सा बनने लगा हूं , मेरा भी मूल्य बढ़ने लगा है ,जहां भी पैदा हो रहा हूं उसके स्वामी को को अच्छा लाभ दे रहा हूं मेरा सम्मान होने लगा है, मुझे खरीदने के लिए क्रेता द्वारा अग्रिम बुकिंग की जाने लगी है ! 
सरकार का भी भरसक प्रयास हो रहा है कि मैं बच्चों और गर्भवती महिला के भोजन का हिस्सा  बनू क्योंकि मुझ में सभी तरह के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो इन दोनों के लिए आवश्यक हैं !
शोधार्थियों ने मुझ पर कृपा की और मेरा भाग्य बदल गया , अब मैं देश ही नहीं विदेशों की भी सैर  करता हूं मेरा अच्छा मूल्य मिलने लगा है यहां तक की अब मेरे नाम के अंतरराष्ट्रीय मेले भी लगने लगे हैं जहां पर सिर्फ मेरी ही चर्चा एवं बातें होती हैं कि मेरी पैदावार को कैसे बढ़ाया जाए ताकि मुझे आमजन के भोजन में शामिल किया जा सके ! 
इस बीच मुझे अंतरराष्ट्रीय मेले में जाने का अवसर प्राप्त हुआ वहां पर एक सज्जन द्वारा कहा गया कि वह 6 माह सर्दियों में भोजन के रूप में मेरी ही रोटी बनाकर खाते हैं जिससे उनकी मधुमेह की बीमारी ठीक हुई है और शरीर में उनको उर्जा का अनुभव भी होने लगा है ! 
उस दिन मेरी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था मुझे लगा मैं तो भाग्यवान हूं इतने लोग मुझ में रुचि लेने लगे हैं और जहां भी देखो मेरी ही चर्चा हो रही है अब मैं बताना चाहूंगा कि मैं कौन हूं ........
मैं हूं मंडुवा /कोदो /रागी एवं फिंगर मिलेट😊🤗🤗
 मेरी यात्रा👇

विचारक ..
पुष्पा जोशी 
देहरादून, उत्तराखंड


Friday, January 14, 2022

कुमाऊं का लोक पर्व घुघुतिया त्यौहार मकर सक्रांति

मकर सक्रांति के पर्व पर स्नान का बड़ा ही महत्व है कुमाऊं में प्रत्येक व्यक्ति यह  प्रयत्न करता है की  मकर सक्रांति पर सरयू नदी के तट पर ,रामेश्वर तट पर ,काली नदी पर या शारदा नदी  के तट पर गंगा स्नान स्नान हो जाए तो इससे बड़ा और कोई पुण्य नहीं मिल सकता है ! जो नदी में स्नान न कर सके वह अपने घर में ही स्नान के समय गंगाजल का छिड़काव करते हैं  एवं स्नानादि के पश्चात सूर्य की उपासना करना विशेष फलदायक  माना  जाता है!  मकर संक्रांति से पूरे माघ महीने में कई महिलाएं  माघ का व्रत रखती हैं यदि कोई पूरे व्रत नहीं रख पाते हैं तो 3 दिन तक व्रत रखकर भगवान की उपासना करती हैं जिसको Tirmaghi  व्रत भी कहा जाता है ! तत्पश्चात खिचड़ी का भोग निकालकर दान किया जाता है एवं खिचड़ी ही घर में भोजन स्वरूप खाई जाती है !शाम के वक्त कुमाऊं के हर घर में घुघुतिया बनाई जाती है जिसमें आटे में गुड़ के पानी दूध अजवाइन एवं मोहिन मिलाकर आटे को गुथा जाता है ! फिर आटे से अलग-अलग प्रकार की आकृतियां  बनाई जाती हैं जिसमें ढाल, तलवार ,डमरु, घुघूती , एवं उड़द दाल के बड़े होते हैं इनको फिर तेल में तला जाता है !   तल लेने के बाद इनकी माला बनाई जाती है, माला के बीचो बीच में संतरा पीरो दिया जाता है!  अगले दिन सुबह बच्चे यह माला को पहनकर कव्वे को बुलाते हैं और कौवे से आग्रह किया जाता है कि वह मेरी माला के डमरु, ताल ,तलवार ,और बड़े को ले जा और मुझे इसके बदले में उपहार के रूप में सोने का डमरु तलवार और ढाल देकर जा !  अपने समय में जब हम बच्चे थे  घुघुतिया बनाने का बहुत ही उत्साह रहता था एक बच्चा कम से कम अपने हिस्से में 100  घुघुतिया बनाता  था ! प्रत्येक घर में  घुघुतिया की माला बनाकर पूरे गांव में एक दूसरे को साझा की जाती थी लगभग 15 से 20 दिन तक यह माला एक घर से दूसरे घर मैं जाने का सिलसिला चलता रहता था एवं घुघूती की माला से एक दूसरे के घर की बनी मित्रता को एक विश्वास के  डोर में बांधने का संकेत प्रकट करती हे  घुघुतिया की माला!!!!!  

Saturday, January 8, 2022

किसानों की आड़ में चुनावी रैली

सितंबर महीने से लगातार 5 बार किसानों को किसान मेले के नाम से इकट्ठा किया जा रहा है,  की किसान मेले में आओ और कृषि से संबंधित नई -नई तकनीकी की जानकारी लो और कृषि में सुधार हेतु व्याख्यान सुनो , इन 5 बार के किसान मेला के नाम से बहुत बड़ीऔर लंबी तैयारियां होती हैं ! किसानों को उनके गांव से मेला स्थल तक लाने में एक अलग ही महाभारत होती है ,एक तरफ किसान मेले में या संगोष्ठी में आने को तैयार नहीं होता दूसरी तरफ यदि वह आ भी जाता है तो उसके बाद के प्रश्नों का उत्तर देना बड़ा मुश्किल सा होता है! किसान सुबह से मेले में या संगोष्ठी में आ जाते हैं दिन भर उनको बिठाया जाता है बिना पानी बिना भोजन के, संगोष्ठी मे दिन भर फूहड़  गीत संगीत की धुन बस्ती वजती रहती है किसी को वह संगीत समझ में नहीं आता है और कोई उससे अनजान रहता है क्योंकि वह आज तक सिर्फ अपनी खेती बाड़ी में काम किया हुआ एक वर्ग है वह भला इन फूहड़ गीत संगीत को कैसे समझ समझेगा , लगभग 3:00 या 4:00 माननीय मुख्यमंत्री साहब आते हैं और अपने उद्बोधन  सभी का स्वागत  किया  जाता है उस स्वागत भाषण में कहीं भी कृषक शब्द का उच्चारण नहीं होता है भले ही वह कृषक गोष्ठी एवं  कृषक मेला है उस से भला उनको क्या करना उन्हें तो भीड़ दिखती है भले ही वह कैसी भी हो ! उनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की इस भीड़ में अन्नदाता बैठा है या कोई और उनका उद्देश्य सिर्फ अपनी चुनावी रैलियों का लक्ष्य पूरा करना होता है, ऐसी घोषणाएं की जाती हैं जिनका उस किसान के जीवन में कोई  सीधे लाभ है ही नहीं ,इन सब कृषक संगोष्ठी  या मेलों में कोई कृषि तकनीकी  या कोई  कृषि  यंत्रों की या कृषि उपज विपणन की कोई बात नहीं होती है ! भाषण होते हैं तो सिर्फ मूर्तियां बनाने की ,खेल ग्राउंड बनाने की ,सड़क बनाने की ! मुझे सबसे बड़ा पश्चाताप औरआश्चर्य तब होता है जब समापन में भी आए हुए किसानों को धन्यवाद तक नहीं कहा जाता दिन भर का भूखा प्यासा किसान हमारी ओर देखकर हाथ जोड़कर सीधे अपने घर को चला जाता है वह समझ ही नहीं पाता  है की आखिर उसको यहां क्यों बुलाया गया दयनीय अनुभव!!....