Thursday, March 10, 2022

कुमाऊनी होली विशेष ... कुमाऊनी होली मात्र ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली ही नहीं है बल्कि...

 मैं बचपन से आज तक देखते आ रही हूं  शिवरात्रि के बाद कुमाऊं में होली अपने  यौवन में रंग भरने लगती है, पौष माह के प्रथम रविवार से प्रारंभ होने वाली होली शिवरात्रि के बाद अपने पूरे चरम पर होती है ,कुमाऊं के लोग चाहे किसी भी शहर में   वास कर रहे हो फाल्गुन आते ही उनका मन होली गायन के लिए मचलने लगता है जाने अनजाने हर कोई होली के गीतों को गुनगुनाने लगता है! 

नदी यमुना के तीर कदम चढ़ी कान्हा बजाई गयो बांसुरिया!
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में!
झनकारो झनकारो झनकारो गोरी प्यारो लागो तेरा झनकारो!

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंग भरे वस्त्र धारण किए जाते हैं महिलाएं व्रत रखकर आंवला पेड़ की पूजा करती है और तत्पश्चात शुरू होती है पांच दिवसीय बैठकी एवं खड़ी होली पुरुष वर्ग एक सामूहिक स्थान में एकत्र होकर अपने इष्ट देव की पूजा कर  चीर बंधन करते हैं, पुरुषों में होली  गायन में  मुख्यतः विशेष श्रृंगार रहता है जिसमें संयोग वियोग के परिदृश्य को गीतों के माध्यम से गाया जाता है , पुरुष वर्ग की होली में जय जयवंती ,भैरवी आदि राग रागिनी की तर्ज पर गाई जाती है,  वहीं महिला वर्ग  में राधा कृष्ण का  प्रेम, गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम श्रद्धा भाव , राम के बनवास का वर्णन ,रावण का अशोक वाटिका में जाना, मंदोदरी का सीता से मिलना, राम विवाह ,शिव भक्ति, राम भरत मिलाप ,का वर्णन एवं साथ ही साथ देवर भाभी का मजाकिया अंदाज , एक महिला का अपने सैया से बिरह वियोग  होना, ननद भाभी की अठखेलियां एवं सखियों के साथ राधा का कृष्ण के प्रति प्रेम को बहुत ही शानदार एवं श्रृंगार के साथ लइबद्ध तरीके से गाए जाते हैं , ढोलक मजीरा की धुन इन गीतों को और भी मोहक मनमोहक बना देती हैं !

एकादशी से पूर्णिमा तक कुमाऊं के हर घर में होली गायन की परंपरा सदियों से चली आ रही है दोपहर 1:00 बजे से शाम के लगभग 6:00 बजे तक पुरुष एवं महिलाएं होली को होली गायन से फुर्सत नहीं रहती है वही  शहरों की बात करें तो दिल्ली,देहरादून ,कानपुर ,लखनऊ ,चंडीगढ़, इंदौर, पुणे मुंबई जैसे बड़े शहरों में रह रहे कुमाऊं के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा का निर्वहन बड़े उल्लास से कर रहे हैं! 

विचारक
पुष्पा  जोशी
10 March 2022
23:47

Monday, March 7, 2022

महिला दिवस 8.March.2022 पर विशेष

आज बड़ी बिंदी वाली 👩‍🏫, 🤭 उदारवादी  महिलाओं का दिन बड़े-बड़े कॉन्फ्रेंस में महिला अधिकारों के मुद्दे पर चर्चा करते हुए व्यतीत हो रहा होगा या होगा , या फिर वातानुकूलित कमरे में गर्म -गर्म सूप या कॉफी का सेवन करते साथ में महिला घरेलू हिंसा या सामाजिक शोषण जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रही होंगी की जा रही होगी! 

मेरे मन में एक प्रश्न है यह उदारवादी  महिलाएं क्या  इन्होंने अपने घर में काम करने वाली महिला को आज के दिन अवकाश दिया होगा?

सबसे पहले प्रात: से ही उससे घर का झाड़ू पोछा बर्तन का काम करवाया होगा या फिर उसको बोला होगा आज सुबह जल्दी आ जाना क्योंकि मुझे कॉन्फ्रेंस में या किसी पार्टी में जाना है क्योंकि आज महिला दिवस है !

900 चूहे खाकर बिल्ली चली हज को 😆

धिक्कार है तुझे एवं तेरी अंतरात्मा को महिला दिवस के नाम पर तू पार्टी कर रही है या महिला मुद्दों के नाम पर दिखावा एवं छलावा कर रही है, यह तेरा ही अंतरूप है  जिसके साथ तू ऐसा व्यवहार कर रही है तुझे महिला कहूं या राक्षसी तू तो अपनी परछाई भी नहीं पहचान पा रही है!
मैंने तो सुना है कि महिलाओं को सम्मान और प्यार देने को लेकर और उनके हौसलों को बुलंद करने और असमानता को कम  करने के लिए यह दिन काफी है लेकिन क्या हम यह कर पाते है स्वयं से अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए..

इसलिए राह संघर्ष की हम चुने जिंदगी आंसुओं से नहाई  ना हो शाम  शहमी  ना हो , रात हो ना डरी भोर की आंख  फिर ढब Dabayi ना हो!

बड़े-बड़े कॉन्फ्रेंस में भाषण बाजी करना सिर्फ महिला मुद्दों पर बातें करना महिला दिवस नहीं होता है , महिला दिवस  यदि वास्तविकता में महिला दिवस मनाना ही है तो उसके लिए बुनियादी काम करने की आवश्यकता है जिससे उस  जरूरतमंद महिला को वास्तव में खुशी हो जिससे उसकी आत्मा खुश हो जाए !! 



विचारक 
पुष्पा जोशी 
8 March 2022 
11:00am