बाजारवाद के दिखावटी पन के कारण शुद्धता की पहचान का कम होना!
Sunday, December 31, 2023
मधु ...शीत ऋतु मैं स्थिति
एक जैसे समान तापमान में दोनों की भिन्न-भिन्न स्थिति, बाजार में उपलब्ध मधु एवं प्राकृतिक रूप से उपलब्ध पहाड़ों का मधु !
Saturday, December 30, 2023
जूली आज बहुत उदास है😭
आज यह अपने घर के सामने अकेले बैठी अपने बच्चों का इंतजार कर रही है , आज प्रातः काल इसके बच्चों को नगर निगम लेकरचली गई है ,बहुत रोई बहुत चिल्लाई पर उन्होंने इसकी एक भी नहीं सुनी, यह पूरे दिन बहुत उदास रही ,बस मौन बनी बैठी रही दिन भर चारों तरफ अपने बच्चों को ढूंढती रही इसे आज कुछ भी अच्छा नहीं लग रह बहुत उदास है!
मां की ममता तो एक समान है चाहे वह मनुष्य हो या पशु !😭😭😭😭
Faith
Pushpa
30.12.2023
Wednesday, December 27, 2023
घर की आवश्यकता
रहने के लिए छत की आवश्यकता सभी को होती है, सर्दियों की गुनगुनी धूप का आनंद यह भी लेते हैं एवं दिन ढलते ही यह भी अपने घरौंदे में चले जाते है!
Saturday, December 23, 2023
राष्ट्रीय किसान दिवस 23 दिसंबर
जंगली प्याज, शायद आप सोच रहे होंगे कि प्याज तो सुना है लेकिन जंगली प्याज क्या होता है? जंगली प्याज के लाभ आयुर्वेद में बहुत सारे हैं। आयुर्वेद में प्याज का इस्तेमाल कई तरह के बीमारियों के लिए औषधि के रुप में किया जाता है।
Thursday, November 23, 2023
बूढ़ी दिवाली एवं ईगास पर्व.
वास्तव में हमारे लोक पर्व ,परंपरा, एवं संस्कृति कितनी समृद्ध है, खुशी मनाने एवं खुशियां बांटने का अनूठा संगम होता है इन त्योहारों में , प्रत्येक त्यौहार को सुख समृद्धि एवं वैभव से जोड़ा गया है. इन त्योहारों /पर्वों में सामाजिक, धार्मिक एवं वैज्ञानिक तथ्य देखने को मिलते हैं .....
औषधीय पौधा तुलसी की विधिवत पूजा करना ताकि जितनी देर भी उसे पौधे के समक्ष बैठे उससे कुछ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो.
प्रत्येक त्यौहार भाग दौड़ भरी एवं तनावपूर्ण जिंदगी में एक नया उत्साह भर देते हैं...
Pushpa Joshi
Dehradun
23.11.2023-
23:18
Tuesday, November 21, 2023
टीमवर्क
कारपोरेट जगत के कार्य स्थल या अन्य संस्थानों में एक दूसरे की टांग खीचने वाले टीम के सदस्यों को इन लोगों से सीखना चाहिए की टीमवर्क क्या होता है , इसमें कहीं पर भी अपने बॉस के साथ मीठा- मीठा बोलने वाली जैसी कोई चीज कहीं नजर नहीं आती है.
Dehradun
21.11.2023, 21:51
Friday, November 10, 2023
पांचवीं बार पुनर्जन्म🙏
आज भी स्मरण है तेरा आज के दिन एक बार फिर से पुनर्जन्म हुआ था ,सुबह से घर के सारे कार्य का निष्पादन करके घास काट कर लाना सर के ऊपर लगभग 25 से 30 किलो का वजन घास का भारी गट्टा आंगन में डालकर बैठ जाना एवं अपनी शारीरिक पीड़ा का अनुभव अपनी देवरानी के साथ साझा करना, फिर उठकर घर के सारे कार्य भोजन की व्यवस्था, गाय बछिया के लिए हरा चारा ,पानी की व्यवस्था करना, रात्रि का भोजन बनाना , घर गृहस्ती के सारे कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ करना और लगभग रात्रि 9:00 बजे स्वयं पड़ोस की अम्मा को बुला कर लाना जो उस समय उस क्षेत्र की समस्त महिलाओं को एक नया जीवन प्रदान करने में अपनी पूर्ण जिम्मेदारी एवं निष्ठा के साथ अपना कार्य एवं उस महिला का (प्रसव पीड़ा के दौरान) हौसला बढ़ाने का कार्य करती थी उनको बुलाकर लाई क्योंकि शायद तुझे तेरी प्रसव पीड़ा का अनुभव हो चुका था! 4 से 5 घंटे की भयंकर प्रसव पीड़ा सहन करने के पश्चात तेरा पुनर्जन्म हुआ ! ऐसी स्थिति में भी घर के सारे निर्णय लेना बच्चों को देखना ,अगले दिन दीपावली थी दीपावली में क्या-क्या सामग्री लाना एक जच्चा के रूप में तूने सारे निर्णय लिए और अगले दिन अपने फौजी पति को पत्र भी लिखा की बेटा पैदा हुआ है ! अगली सुबह से ही तो फिर से अपने कार्यों में भिड़ गई थी रात्रि को आस पड़ोस की महिलाएं मंगल गान गाने आई और तूने अपनी पूर्ण प्रतिभा उसमें भी दिखाई, मात्र नामकरण संस्कार तक तूने थोड़ा बहुत आराम किया होगा (केवल 11 दिन )उसके पश्चात पूरी शक्ति के साथ अपने दैनिक कार्यों में जुट गई, सहयोग करने के लिए साथ में कोई नहीं था ! तू एक शक्ति का रूप ही तो है ....
कोमल है कमजोर नहीं शक्ति का नाम नारी है
Pushpa...
FAITH ...
Thursday, August 3, 2023
अब मैं कौन....
एक समय ऐसा भी था मेरे लालन पालन मे मुझे पोषित करने मे ध्यान दिया जाता था मुझे भरपूर पानी मिलता रहे इसकी चिंता सबको होती थी लेकिन जब मेरा प्रतिस्पर्धी बाज़ार में आया उस समय से मे अपने घर से ही बेघर होने लगा , मुझे प्रतिदिन के भोजन से अलग कर दिया मुझे मोटे अनाज की सैणी का दर्जा मिलने लगा ..
लेकिन आज भी मेरे ही आटे से साई , हलवा, सिंगल पूवे एवं खीर बनाने के लिए मुझे ढूढ़ने का प्रयास किया जाता है परन्तु अब मे बहुत कठिनाई से प्राप्त हो रहा हूं!
Pushpa Joshi
3.8.2023
11.18pm
Thursday, July 27, 2023
भांग एक औषधीय पौधा है
भांग के बीज की चटनी भोजन में अपना अलग महत्व रखती है ,आयुर्वेद में इस पौधे का औषधीय महत्त्व रहा है ,बाल्यावस्था मे कई बार मैंने हमसे पहले पीढ़ी के लोगों को वात के उपचार हेतु औषधि के रूप में इसका उपयोग करते हुए देखा है तथा अन्य व्याधियों में भी....
पुष्पा जोशी
27.7.2023
23:2
Friday, March 31, 2023
हरेला ,हरियाली, ज्वारा की कटाई 31.3.2023
खरीफ फसल की बुवाई से पहले चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस मे खरीफ फसलों के बीजों की बुवाई की जाती है जिस पर मां विराजमान होती है !
इस बुवाई से हमारे बड़े बुजुर्गों द्वारा पूर्वानुमान लगाया जाता था कि इस वर्ष खरीफ की उपज कैसी होगी यदि यह हरियाली अच्छी हुई तो खरीफ का उत्पादन भी उत्तम ही होगा यह एक आंकलन हुआ करता था !
क्योंकि हर त्योहार हर उत्सव कृषि आधारित होता था इस आधुनिक युग में पुरानी परंपराएं मान्यताएं ज्ञान लुप्त प्रायः हो रहा है!
Sunday, March 26, 2023
Travelogue
Travel is a big book it self.
सफर के दौरान हर तरह के लोगों से मिलना होता है!
जिनमें से कुछ हमेशा याद रहते हैं तो कुछ को भूल जाना चाहते हैं।
Pushpa
5.50
26.3.2023
Wednesday, March 8, 2023
8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023
इसलिए राह संघर्ष की हम चुने जिंदगी आसुओं से नहाई ना हो , शाम सहमी ना हो रात हो ना डरी , भोर की आंख फिर डबडबाई ना हो...
विचारक !
पुष्पा जोशी
देहरादून
5:00
8. 3.2023
Thursday, January 26, 2023
ऋतुराज (मेरे नए श्रंगार का दिन)
आज मेरा नवीन रूप एवं सौंदर्य का दिन है अब मैं अपनी सुप्त अवस्था को त्याग कर पुनः अपने सौंदर्य को सवारने में व्यस्त हो जाऊंगी !
Saturday, January 7, 2023
मेरी यात्रा
मैं उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पैदा होता हूं । मेरा स्वाद हर उत्तराखंडी जानता है , मैं देश और दुनिया के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेता हूं । सर्दियों के वक्त विटामिन सी से भरपूर होता हूं । मैं साइट्रस प्रजाति का हूं, मेरा वैज्ञानिक नाम सिट्रस सीनेंसिस है।
आज से 10 वर्ष पूर्व मैं एवं मेरी प्रजाति बहुत मात्रा में होती थी लेकिन धीरे-धीरे हनुमंत के दूतों द्वारा मेरा अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है !
मुझे वर्तमान परिस्थितियों में बचाने की बहुत कोशिश की जाती है परंतु जैसे ही मेरे फल अपनी अवस्था के मध्य आयु में पहुंचते हैं वैसे ही बजरंगबली की सेना द्वारा मुझे समाप्त कर दिया जाता है जिस पर मेरा मालिकाना हक होता है वह बड़ी मुश्किल से मुझे मेरी आयु तक पहुंचाने में कुछ हद तक सफल होता है !
जब मैं पककर खाने योग्य हो जाता हूं तब मुझे पहाड़ों से शहरों तक भी पहुंचाया जाता है जैसे-जैसे में पहाड़ से नीचे उतरता जाता हूं वैसे ही मेरी कीमत भी बढ़ती जाती है मैं भी बस के धक्के खा कर बड़ी मुश्किल से अपने आप को बचाते हुए शहर पहुंचता हूं और यहां पर अपने स्वाद एवं अपने गुणों से लोगों का दिल जीत लेता हूं !
यदि मुझे बचाने में एवं मेरी पैदावार को बढ़ाने में थोड़ा बहुत और ध्यान दिया जाए तो मैं आप सभी के लिए कारगर सिद्ध रहूंगा ! ⁹
Pushpa Joshi
Dehradun
7.1.2023
22:24
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