Thursday, November 23, 2023

बूढ़ी दिवाली एवं ईगास पर्व.

वास्तव में हमारे  लोक पर्व ,परंपरा, एवं संस्कृति कितनी समृद्ध है, खुशी मनाने  एवं खुशियां बांटने  का अनूठा संगम होता है इन त्योहारों में , प्रत्येक त्यौहार को सुख समृद्धि एवं वैभव से जोड़ा गया है. इन त्योहारों /पर्वों में सामाजिक, धार्मिक एवं वैज्ञानिक तथ्य देखने को मिलते हैं .....
ओखली को सजाना एवं उसका पूजन करना.
सूप में भगवान नारायण एवं मां लक्ष्मी के रूप का आलेखन के माध्यम से चित्रण करना.
औषधीय पौधा  तुलसी की विधिवत पूजा करना ताकि जितनी देर भी उसे पौधे के समक्ष बैठे उससे कुछ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो.

प्रत्येक त्यौहार भाग दौड़ भरी एवं तनावपूर्ण जिंदगी में एक नया उत्साह भर देते हैं...

Pushpa Joshi
Dehradun 
23.11.2023- 
23:18


Tuesday, November 21, 2023

टीमवर्क

कारपोरेट जगत के कार्य स्थल या अन्य  संस्थानों  में एक दूसरे की टांग  खीचने वाले टीम के सदस्यों को इन लोगों से सीखना चाहिए की टीमवर्क क्या होता है , इसमें कहीं पर भी अपने बॉस  के साथ मीठा- मीठा बोलने वाली जैसी कोई चीज कहीं नजर नहीं आती है.

Pushpa Joshi 
Dehradun 
21.11.2023, 21:51





Friday, November 10, 2023

पांचवीं बार पुनर्जन्म🙏

आज भी  स्मरण है तेरा आज के दिन एक बार फिर से पुनर्जन्म हुआ था ,सुबह से घर के सारे कार्य का निष्पादन करके घास काट कर लाना सर के ऊपर  लगभग 25 से 30 किलो का वजन घास का   भारी  गट्टा आंगन में  डालकर बैठ जाना एवं अपनी  शारीरिक पीड़ा का अनुभव  अपनी देवरानी के साथ साझा करना, फिर  उठकर  घर  के सारे कार्य भोजन की व्यवस्था, गाय बछिया के लिए हरा चारा ,पानी की व्यवस्था करना, रात्रि का भोजन बनाना , घर गृहस्ती के सारे कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ करना और लगभग रात्रि 9:00 बजे स्वयं पड़ोस की अम्मा को बुला कर लाना जो उस समय उस क्षेत्र की समस्त महिलाओं को एक नया जीवन प्रदान करने में अपनी पूर्ण जिम्मेदारी एवं निष्ठा के साथ अपना कार्य एवं उस  महिला का  (प्रसव पीड़ा के दौरान) हौसला बढ़ाने का कार्य करती थी उनको बुलाकर लाई  क्योंकि शायद तुझे तेरी प्रसव पीड़ा का अनुभव हो चुका था!  4 से 5 घंटे की भयंकर प्रसव पीड़ा  सहन करने  के पश्चात  तेरा पुनर्जन्म हुआ !  ऐसी स्थिति में भी घर के सारे निर्णय लेना बच्चों को देखना ,अगले दिन दीपावली थी दीपावली में क्या-क्या सामग्री लाना एक जच्चा  के रूप में  तूने सारे निर्णय लिए और अगले दिन अपने फौजी पति को  पत्र भी लिखा की बेटा पैदा हुआ है ! अगली सुबह से ही तो फिर से अपने कार्यों में भिड़ गई थी रात्रि को आस पड़ोस की महिलाएं मंगल गान गाने आई और तूने अपनी पूर्ण प्रतिभा उसमें भी दिखाई, मात्र नामकरण संस्कार तक तूने थोड़ा बहुत आराम किया होगा (केवल 11 दिन )उसके पश्चात पूरी शक्ति के साथ अपने  दैनिक कार्यों में जुट गई, सहयोग करने के लिए साथ में कोई नहीं था !   तू एक शक्ति का रूप ही तो है .... 

कोमल है कमजोर नहीं शक्ति का नाम नारी है
Pushpa... 
FAITH ...