आज भी स्मरण है तेरा आज के दिन एक बार फिर से पुनर्जन्म हुआ था ,सुबह से घर के सारे कार्य का निष्पादन करके घास काट कर लाना सर के ऊपर लगभग 25 से 30 किलो का वजन घास का भारी गट्टा आंगन में डालकर बैठ जाना एवं अपनी शारीरिक पीड़ा का अनुभव अपनी देवरानी के साथ साझा करना, फिर उठकर घर के सारे कार्य भोजन की व्यवस्था, गाय बछिया के लिए हरा चारा ,पानी की व्यवस्था करना, रात्रि का भोजन बनाना , घर गृहस्ती के सारे कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ करना और लगभग रात्रि 9:00 बजे स्वयं पड़ोस की अम्मा को बुला कर लाना जो उस समय उस क्षेत्र की समस्त महिलाओं को एक नया जीवन प्रदान करने में अपनी पूर्ण जिम्मेदारी एवं निष्ठा के साथ अपना कार्य एवं उस महिला का (प्रसव पीड़ा के दौरान) हौसला बढ़ाने का कार्य करती थी उनको बुलाकर लाई क्योंकि शायद तुझे तेरी प्रसव पीड़ा का अनुभव हो चुका था! 4 से 5 घंटे की भयंकर प्रसव पीड़ा सहन करने के पश्चात तेरा पुनर्जन्म हुआ ! ऐसी स्थिति में भी घर के सारे निर्णय लेना बच्चों को देखना ,अगले दिन दीपावली थी दीपावली में क्या-क्या सामग्री लाना एक जच्चा के रूप में तूने सारे निर्णय लिए और अगले दिन अपने फौजी पति को पत्र भी लिखा की बेटा पैदा हुआ है ! अगली सुबह से ही तो फिर से अपने कार्यों में भिड़ गई थी रात्रि को आस पड़ोस की महिलाएं मंगल गान गाने आई और तूने अपनी पूर्ण प्रतिभा उसमें भी दिखाई, मात्र नामकरण संस्कार तक तूने थोड़ा बहुत आराम किया होगा (केवल 11 दिन )उसके पश्चात पूरी शक्ति के साथ अपने दैनिक कार्यों में जुट गई, सहयोग करने के लिए साथ में कोई नहीं था ! तू एक शक्ति का रूप ही तो है ....
कोमल है कमजोर नहीं शक्ति का नाम नारी है
Pushpa...
FAITH ...
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