Tuesday, April 2, 2024

तुम्हारी टप- टप ..

तुमको देखकर मन किसी का होता है प्रफुल्लित तुम्हारी बूंद से  तप्ती एवं झुलसी हुई धरती में शीतलता हो जाती है, मयूर पंख  फैला -फैला कर नृत्य को आतुर होते हैं तुम्हारी टप- टप  से बीजों में अंकुर फूटे हैं! 
Faith
Pushpa 
2.4.2024
17.30 

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